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कैसा हो आपका वास्तुसम्मत ऑफिस : OFFICE AS PER VASTU SHASTRA

Posted by Rameshwar Prasad in Vastu Blogs
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अक्सर लोग मकान, दुकान या ऑफिस बनाते समय वास्तु के बारे में जानकारी लेते देखे जाते हैं। सवाल उठता है कि आखिर वास्तु है क्या और इसके अनुसार मकान, दुकान आदि नहीं बनाने पर क्या होता है। क्या यह कोई विज्ञान है या विज्ञान की कोई शाखा या फिर कोई अंधविश्वास। प्राचीन मान्यताओं की मानें तो हर दिशा विशेष गुण लिए होती है और उन गुणों के मुताबिक इमारत बनाने से लाभ होता है। इन्हीं बातों को दूसरे शब्दों में लोग दिशाओं का विज्ञान मानते हैं और इसके अनुरूप निर्माण कार्य कराने का भरपूर यत्न करते हैं। वास्तु आजकल लोगों के जीवन में उतर चुका है, उनकी जरूरत बन गया है। लोगों की इसी जरूरत ने इसे एक बड़ा करियर बना दिया है, जिसमें संभावनाओं की भरमार है।

वास्तु के दृष्टिकोण से एक अच्छे आफिस में बैठते हुए यह ध्यान रखना जरूरी हैं कि स्वामी की कुर्सी आफिस के दरवाजे के ठिक सामने ना हो ।

कमर के पीछे ठोस दीवार होनी चाहिए । यह भी ध्यान रखे कि आफिस की कुर्सी पर बैठते समय आपका मुंह पूर्व या उत्तर दिशा में रहे।

आपका टेलिफोन आपके सीधे हाथ की तरफ, दक्षिण या पूर्व दिशा में रहें तथा कम्प्यूटर भी आग्नेय कोण में (सीधे हाथ की तरफ) होना चाहिए ।

इसी प्रकार स्वागत कक्ष (रिसेप्शन) आग्नेय कोण मे होना चाहिए लेकिन स्वागतकर्ता (रिसेप्सनिष्ट) का मुंह उत्तर की ओर होना चाहिए जिससे गलतियां कम होगी ।

आफिस में मंदिर (पूजा स्थल) ईशान कोण में होना चाहिए परन्तु इस स्थान पर एक गमला अवश्य रखें जिससे आफिस की शोभा बढ़ेगी। फाईल या किताबों की रेक वायव्य या पश्चिम में रखना हितकारी होगा ।

परन्तु पूरब की तरफ मुंह करके बैठते समय अपने उल्टे हाथ की तरफ ‘‘कैश बाक्स‘‘ (धन रखने की जगह) बनाए इससे धनवृद्धि होगी

उत्तर दिशा में पानी का स्थान बनाए । दक्षिण दिशा में प्रमाण पत्र, शिल्ड व मेडल तथा अन्य प्राप्त पुरस्कार को सजा कर रखें ।

ऐसा करने से आपका आफिस निश्चित रूप से वास्तु संम्मत कहलाएगा व आपको शांति व संमृद्धि देने के साथ साथ आपकी उन्नति में भी सहायक होगा ।

यदि काम रचनात्मक है, तो केबिन की दिशा मुख्य द्वार के विपरीत रखें। अगर आपने ऑफिस घर में ही बनाया हुआ है, तो वह बेडरूम के पास न हो। कॉरपोरेट जगत से जुड़े हैं, तो केबिन की दिशा मेन गेट की ओर रखें।

भारतीय ज्योतिष दर्शन के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को दो कारणों से दुख मिलते हैं, गृह दोष और ग्रह दोष। गृह का मतलब है व्यक्ति का घर और ग्रह का मतलब है व्यक्ति की कुंडली के ग्रह। जन्मपत्री में दसवां घर व्यक्ति के प्रोफेशनल करियर पर रोशनी डालता है। यदि जन्मपत्री के दसवें घर में सूर्य हो, तो व्यक्ति को सिर ढकने से करियर में बहुत सहायता मिलती है। वास्तुशास्त्र की लाल किताब के अनुसार, रोजाना गाय, कौए और कुत्ते को खाना खिलाने से व्यक्ति के जीवन में शांति और समृद्धि आती है।

आपके केबिन की लोकेशन –
अगर आपका काम रचनात्मक है, यानी आप लेखन, पत्रकारिता और फिल्म आदि से जुड़े हैं, तो आपके केबिन की दिशा मुख्य दरवाजे के दूसरी ओर यानी विपरीत होनी चाहिए। अगर ऑफिस घर में ही बना हो तो यह बेड रूम के पास नहीं होना चाहिए। अगर आप राजनीति या कॉरपोरेट जगत से जुड़े हैं, तो आपके केबिन की दिशा मेन गेट की ओर हो।

बैठने का इंतजाम –
जब आप मीटिंग रूम में हों तो नुकीली मेज काम में न लाएं। कभी भी मीटिंग में दरवाजे के करीब और उसकी तरफ पीठ करके न बैठें।

मेज का आकार –
करियर में तरक्की के लिए अंडाकार, गोल और यू के आकार की मेज को सही नहीं माना जाता है। इसे चौकोर होना चाहिए। ऑफिस के काम के लिए लकड़ी की मेज को अच्छा मानते हैं। मेज को केबिन के दाहिने किनारे से दूर रखना चाहिए।

फूलों का प्रभाव –
मेज के पूर्व में ताजे फूल रखें। इनमें से कुछ कलियां निकल रही हों तो यह नए जीवन का प्रतीक माना जाता है। फूलों को झड़ने से पहले ही बदल देना शुभ होता है।

विभिन्न कार्यालयों हेतु शुभ रंग –

1 किसी डाक्टर के क्लिनिक में स्वयं का चैम्बर सफेद या हल्के हरे रंग का होना चाहिए ।

2 किसी वकील का सलाह कक्ष काला, सफेद अथवा नीले रंग का होना चाहिए ।

3 किसी चार्टर्ड एकाउन्टेंट का चैम्बर सफेद एवं हल्के पीले रंग का हो सकता हैं ।

4 किसी ऐजन्ट का कार्यालय गहरे हरे रंग का हो सकता हैं ।

जीवन को समृद्धशाली बनाने के लिए व्यवसाय की सफलता महत्वपूर्ण हैं इसके लिए कार्यालय को वास्तु सम्मत बनाने के साथ साथ विभिन्न रंगों का उपयोग लाभदायक सिद्ध हो सकता हैं ।